भविष्य में.......
सन 2035…
अमेरिका का राष्ट्रपति अपनी
संघर्ष गाथा सुना रहा है कि कैसे वह यहाँ तक पहुंचा है .....
“मैं जमीन से जुड़ा आदमी हूँ ...मैं कोई बड़ा
आदमी नहीं था ....मैं भारत के उत्तरप्रदेश राज्य में पैदा हुआ था , मैं
शिक्षा-मित्र हुआ करता था ....उस समय उत्तरप्रदेश में हमारे पापा मुलायम जी की
सरकार थी ... वर्ष २०१४ की बात थी , हमें समायोजित कर सहायक अद्यापक बना दिया गया
था ...फिर तुरंत उच्च-न्यालय ने हमारा लोहा मानते हुए हमें, सीधे प्रधानाध्यापक पद
पर समायोजन के आदेश दिए ....और हमारे पापा तो एक कदम अगरे रहात ही थे ....उन्होंने
सीधे हमें सिविल की परीक्षा से छूट प्रदान करते हुए p.c.s. कैडर में समायोजित कर दिया ...तब आखिरकार केंद्र
सरकार का दिल भी पसीजा ....तो उसने हमें सीधे कैबिनेट मंत्री परिषद् में समायोजित
कर दिया ...अब तक पूरे भारत में शिक्षामित्रो की लहर चल गयी थी ...जगह जगह धरने
आदी होने लगे ...कुछ समय बाद भारत के सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, पदों पर
शिक्षामित्रो को समायोजित किया जाने लगा ...फिर बहुमत को देखते हुए आखिर मोदी जी
ने स्वंय इस्तीफ़ा देते हुए किसी शिक्षामित्र को ही देश के प्रधान-मंत्री पद पर
समायोजित करने की मांग की I .....पूरी दुनिया शिक्षामित्रमय हो गयी ...अब हर देश
में ये मांग होने लगी की हमारे देश के सभी प्रमुख पदों पर शिक्षामित्रो को
समायोजित करना चाह्यिये ....
.....और आपके देश अमेरिका
में तो इस मांग ने आन्दोलन का रूप धारण कर लिया .....तो हिलेरी जी ने स्वय मुझे
बुलाया ....और अमेरिका के राष्ट्रपति पद के लिए आने वाली रुकावटों जिसे दोहरी
नागरिकता ...आदी से छूट प्रदान की ....और ...इससे पहले u.n. ने भी भारत को सिर्फ इसलिए स्थायी सदस्यता दी थी क्योंकि उस
समय २०२३ में एक शिक्षामित्र भारत का प्रधानमंत्री था..और मैं वादा करता हूँ की
शपथ के बाद मैं अमेरिका के झंडे का रंग भी परिवर्तित करा के “ये-लो” (पियरो-रंगु)
का करवा दूंगा ....
और इसी क्रम में मैं पप्पू
शिक्षामित्र पूर्ण सत्यनिष्ठा एवं ईश्वर को साक्षी मानकर अमेरिका के राष्ट्रपति पद
की सुचिता एवं गोपनीयता ....
वस्स ...गोपनीयता तक ही
पहुँच पाए थे ....कि इत्ती देर में राष्ट्रपति जी की गग्ग... पे लात पड़ती है ..और
आवाज आती है ......उठ साले ...बडबडाना बंद
कर ...आज बकरी चराने नहीं जायेगा ...
और इस तरह हमारे पप्पू
शिक्षामित्र का राष्ट्रपति पद का शपथग्रहण समारोह ....का सपना, सपना ही रह जाता है ....
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