देखो सुनो समझो फिर बोलो

Wednesday, 17 June 2015

कविता - उम्मीद है उस बदलाव की ...

पथ को तुम्हारे, आलोकित कर दूंगा मैं ...
ह्रदय में तुम्हारे, दृढ़ता भर दूंगा मैं ...
रक्त में भर दूंगा, मैं आवेश तुम्हारे ...
मन में तुम्हारे, सच भर दूंगा मैं ...

ले मशाल, हिम्मत की तुम
चलना मेरे पीछे-पीछे ....
उस राह पर, बे-धड़क तुम
जिसकी मंजिल देखता हूँ मैं ...

अभी उम्मीद है उस बदलाव की
जिसका सपना देखता हूँ मैं....

रोक दूंगा, तोड़ दूंगा, हर अवरोध को मैं ...
अंत तक बस तुम, संग मेरे रहना .....
पल को, क्षण को, एक अगर, कमजोर पडूं मैं ...
पीछे से तुम आगे आना, मेरे प्रहरी बन जाना ....

असंख्य हाथों का मिलन
असंख्य हाथों से देखता हूँ मैं ...
अभी उम्मीद है उस बदलाव की
जिसका सपना देखता हूँ मैं....

लड़ जाऊंगा, मर जाऊंगा, मैं ...
जान न्योछावर कर जाऊंगा मैं...
बलिदान,   देखता हूँ मैं ...
स्वर्ग में स्थान देखता हूँ मैं ...

अभी उम्मीद है उस बदलाव की
जिसका सपना देखता हूँ  मैं ....

अनन्त धीरज, अनंत साहस,
अनंत विश्वास देखता हूँ मैं ...
अपने दो कदमो के पीछे,
हज़ार कदमो की आवाज़ देखता हूँ मैं ....

अभी उम्मीद है उस बदलाव की
जिसका सपना देखता हूँ  मैं ....

अजब सपना देखता हूँ मैं....
गजब सपना देखता हूँ मैं ...
सपनो पे जान फेंकता हूँ मैं ...
क्यूंकि, सपनो में हिंदुस्तान देखता हूँ मैं ..
सपनो में हिंदुस्तान देखता हूँ मैं ..



अभी उम्मीद है उस बदलाव की

जिसका सपना देखता हूँ  मैं ....

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