आओ यारो !
कुछ करते हैं ....
क्या?
अरे नहीं !
लोग !
लोग तो , डरते हैं ....
आओ यारो !
कुछ तो करते हैं .....
मौका है –
हमेशा होता है---
अरे ! मैं जानता हूँ
पर निठल्लो ! मैं तुमको भी –
अच्छे से पहचानता हूँ ....
बोलो , है हौंसला
तुम कहो –
पक्षी सा उड़ जाने का ...
कुछ पाने का –
कुछ कर जाने का ....
अयं , रहने दो तुम –
तुम तो हर बार –
दम भरते हो ...
सच बताओ यारो !
ठलुआ बैठे भी-
क्या करते हो ....
अयं, क्या कहा ?
दुनिया बड़ी है !
क्या नही अब तुम बड़े –
सच बताना?....
अन्दर से तो तुम भी –
चाहते हो, आगे बढ़ जाना ...
तो क्यों नहीं –
कदम बढ़ाते हो ...
थोड़ी सी हिम्मत-
कर जाते हो....
अयं, क्या कहा जी –
अच्छा.... शरमाते हो .....
यारो! क्यूँ जग में-
हंसी उडवाते हो ....
बंद करो ये –
हँसना और हंसाना ...
तुमको है अब एक-
नयी पहचान बनाना ....
अयं! क्या कहते हो ?
सपनो में तो –
हम भी राजा होतें हैं.....
जागो यारो भ्रम से –
अब, असली में कुछ करतें हैं ....
प्रण, तुम मुझसे एक करो ..
क्या कहा ? हाँ , तुम ?
हाँ तुम, मेरे प्यारे भारत के नाकारा !
अच्छा , मैं कौन हूँ ...
प्रण लेने वाला ?
सच कहते हो तुम आवारा !
चलो यारो ,
तो खुद से ही वादा करो ...
पर भाई अब कुछ करो , कुछ करो.....

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